बरसात का महत्वा
आज
सुबह सुबह दिल्ली में बारिश हुई, आज मैं जल्दी उठ गया था क्योंकि आज मेरा
पेपर था | बरसात जब भी आती है मनो बहार लेके आती है | आज भी सायद कई लोगों के
लिए बहार के रूप में आई होगी | बरसात का इंतज़ार लोग बेशब्री से करते हैं |
जहां एक तरफ बरसात किसानो के लिए वरदान सिद्ध होती है, वहीँ प्रेमी -
प्रेमिकाओं के मन में अजीब सी इच्छा को पैदा कर जाती है, बच्चे तो बरसात का
बेशब्री से इंतज़ार करते हैं क्योंकि उनको बारिश की बूंदों से खेलना बड़ा
पसंद होता है, बारिश जहाँ इन लोगों के लिए खुशियाँ लेके आती है वहीँ दूसरी
तरफ कुछ इनसे भी लोग होते हैं जिनके लिए बरसात का कोई महत्वा नहीं होता |
उनकी ज़िन्दगी में इतने दुःख दर्द होते हैं की उनके लिए होली - दिवाली कोई
मायने नहीं रखती तो फिर बरसात क्या महत्वा रखेगी | वो बरशात का कुछ और ही
मतलब निकलते हैं | उनको लगता है की उनके दुखों को देख कर असमान रो रहा है और
उसके अंशू से पूरी धरती भीग रही है, उनको लगता है की उनके दुःख को देख
के पेड़ के पत्तों से अंशु टपक रहे हैं, उनको लगता है की उनके जीवन में भरे
अँधेरे को देख कर बादलों ने सूर्य भगवन को छुपा लिया है और समस्त संसार
में अँधेरा छ गया है, उनको लगता है की जब हवा ने उनके दुःख की कहानी सुनी
तो वो उत्तेजित हो गई और उसने भयंकर रूप धर लिया है, और वो अपने वेग से
समस्त पृथ्वी में उथल पुथल मचा देना चाहती है.
तभी
बारिश रुक जाती है, मनो सरे संसार में शांति फ़ैल गई हो, इस पर भी उनको
लगता है की जब किसी अनहोनी को सुनकर शोक का माहोल छा जाता है प्रकृति ने
भी कुछ ऐंसा हे रूप बना लिया है.
कुछ देर बाद
बादलों को चीरती हुई सूर्य की एक किरण आती है जो उसकी आँखों में आंखे डालती
है मनो उस से कुछ कह रही हो, फिर उसे एहसास होता है की उसके जीवन के अँधेरे
में अभी एक किरण बाकि है, जिस किरण के सहारे उससे अपनी ज़िन्दगी गुजारनी
है.
जय माँ झंदेवाली सब तेरा हे तेरा.

wow it's realy great sir ...........
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