Saturday, 31 March 2012



बस एक्सिडेंट



कल मैं बस स्टैंड पर बस का इंतज़ार कर रहा था, तो मैं देखता हूँ की वहां पर बहुत भीड़ इकठ्ठा हो राखी थी, मैंने एक आदमी से पूछा क्या हुआ भाई, इतनी भीड़ क्यों हो राखी है यहाँ पर, तो उसने बताया की यहाँ पर ३९ नंबर बस ने एक बुजुर्ग आदमी को कुचल दिया है और उनके दोनों पैर कट गए हैं. मैंने कहा उनको हॉस्पिटल पहुँचाया की नहीं ?. उसने कहा नहीं वो लोग तो अभी आपस में लड़ रहे हैं | मैंने जाकर देखा तो आनंद पर्वत के कुछ समझदार लोग ड्राईवर और कंडक्टर के साथ बहस कर रहे थे | अपनी दादागिरी दिखा कर उनको समझा रहे थे की ड्राईवर को किस तरह गाड़ी चलानी चाहिए कहाँ पर बस रोकनी चाहिए और कहाँ पर नहीं रोकनी चाहिए | मैंने वहां पर जाकर देखा तो वो बुजुर्ग आदमी जिनका एक्सिडेंट हुआ था दर्द से तड़प रहे थे और लोग उनको हॉस्पिटल पहुँचाने के वजह बहस कर रहे थे और पुलिस का इंतज़ार कर रहे थे | मैंने उन लोगो से कहा की भाई पहले इन अंकल जी को हॉस्पिटल पहुंचा दो वो मर जायेंगे आप लोग बाद में बहस कर लेना | उनमे से एक आदमी बोला की गाड़ी बुक करनी पड़ेगी तू करेगा गाडी बुक ? | मेरी जेब में ३० रुपये पड़े थे लेकिन मैं फिर भी गाड़ी बुक करने चला गया | इतने में एक आदमी एक स्कूटर वाले को लेके आ गया | मैंने और एक दो और लोगों ने अंकल जी को स्कूटर में बिठाया और हॉस्पिटल की तरफ लेके चले गए | मेरे साथ स्कूटर में एक लड़का और था मुझे तो पता भी नहीं था की उन्हें कौन से हॉस्पिटल लेके जाना है लेकिन उस समय यह सोचने का भी टाइम नहीं था क्योंकि अंकल जी की हालत बहुत ख़राब हो राखी थी | जो लड़का मेरे साथ स्कूटर में बैठा था थोड़ी दूर जाकर उसने स्कूटर वाले को बोला की स्कूटर दूसरी साइड ले लो उस तरफ उन लोगों की गाडी रोक राखी है | जिनके ऑफिस में अंकल जी काम करते थे वो लोग अंकल जी को हॉस्पिटल पहुंचा देंगे | स्कूटर वाले ने आनंद पर्वत रेड लाइट से यु टर्न लेकर स्कूटर दूसरी तरफ मोड़ दिया | आगे कुछ ही दुरी पर काले रंग की गाड़ी खड़ी थी हमने अंकल जी को उठाकर गाड़ी में लिटा दिया और उन्हें हॉस्पिटल की तरफ ले गए | मैं अंकल जी के सर की तरफ था और उनके सर के निचे मैंने अपना हाथ लगा रखा था | एक लड़का और अंकल जी के पैरों की तरफ बैठा था | अंकल जी के दोनों पैर कटे हुए थे | अंकल जी को बहुत दर्द हो रहा था | मैंने अंकल जी को धीरज रखने को कहा मेरी जुवान में माँ झंदेवाली का नाम आ रहा था | अंकल जी बोल रहे थे की मैंने किसी  का क्या बिगाड़ा था | अंकल जी की हालत देख कर बहुत दुःख हो रहा था | मुझसे उनकी हालत देखि नहीं जा रही थी | अंकल जी ने मुझसे कहा बेटा सबका मालिक एक, तू चिंता मत कर मैं ठीक हूँ | खुद तो दर्द से उनका बुरा हाल था और वो मुझसे बोल रहे थे की तू चिंता मत कर | कल से बार बार मेरी आँखों में अंकल जी का चेहता आ रहा है | अंकल जी मेरे सर पर हाथ रख कर बार बार कह रहे थे की बेटा तू चिंता मत कर मैं ठीक हूँ | कुछ देर बाद गाड़ी जीवन माला हॉस्पिटल में पहुँच गयी | हमने अंकल जी को ट्रोली में लिटाया और आपातकालीन में ले गए | अंकल जी को बहुत दर्द हो रहा था | फिर मैं थोड़ी देर बाद वापस आ गया | माँ झंदेवाली अंकल जी को दर्द सहने की शक्ति देना और उनकी आगे की ज़िन्दगी को सुखमय बनाना |
JAI MAA JHANDEWALI
बरसात का महत्वा
                                                                 बरसात का महत्वा

आज सुबह सुबह दिल्ली में बारिश हुई, आज मैं जल्दी उठ गया था क्योंकि आज मेरा पेपर था | बरसात जब भी आती है मनो बहार लेके आती है | आज भी सायद कई लोगों के लिए बहार के रूप में आई होगी | बरसात का इंतज़ार लोग बेशब्री से करते हैं | जहां एक तरफ बरसात किसानो के लिए वरदान सिद्ध होती है, वहीँ प्रेमी - प्रेमिकाओं के मन में अजीब सी इच्छा को पैदा कर जाती है, बच्चे तो बरसात का बेशब्री से इंतज़ार करते हैं क्योंकि उनको बारिश की बूंदों से खेलना बड़ा पसंद होता है, बारिश जहाँ इन लोगों के लिए खुशियाँ लेके आती है वहीँ दूसरी तरफ कुछ इनसे भी लोग होते हैं जिनके लिए बरसात का कोई महत्वा नहीं होता | उनकी ज़िन्दगी में इतने दुःख दर्द होते हैं की उनके लिए होली - दिवाली कोई मायने नहीं रखती तो फिर बरसात क्या महत्वा रखेगी | वो बरशात का कुछ और ही मतलब निकलते हैं | उनको लगता है की उनके दुखों को देख कर असमान रो रहा है और उसके अंशू से पूरी धरती भीग रही है, उनको लगता है की उनके दुःख को देख के पेड़ के पत्तों से अंशु टपक रहे हैं, उनको लगता है की उनके जीवन में भरे अँधेरे को देख कर बादलों ने सूर्य भगवन को छुपा लिया है और समस्त संसार में अँधेरा छ गया है, उनको लगता है की जब हवा ने उनके दुःख की कहानी सुनी तो वो उत्तेजित हो गई और उसने भयंकर रूप धर लिया है, और वो अपने वेग से समस्त पृथ्वी में उथल पुथल मचा देना चाहती है. 
तभी बारिश रुक जाती है, मनो सरे संसार में शांति फ़ैल गई हो, इस पर भी उनको लगता है की जब किसी अनहोनी को सुनकर शोक का माहोल छा जाता है प्रकृति ने भी कुछ ऐंसा हे रूप बना लिया है. 
कुछ देर बाद बादलों को चीरती हुई सूर्य की एक किरण आती है जो उसकी आँखों में आंखे डालती है मनो उस से कुछ कह रही हो, फिर उसे एहसास होता है की उसके जीवन के अँधेरे में अभी एक किरण बाकि है, जिस किरण के सहारे उससे अपनी ज़िन्दगी गुजारनी है. 
जय माँ झंदेवाली सब तेरा हे तेरा. 

अंशू हे आपके सच्चे मित्र हैं.
अंशू हे आपके सच्चे मित्र हैं.
ना जाने क्यों भगवन इन्सान को सपने देखने के लिए प्रेरित करता है, वो बेचारा नासमझी में सपनो के पीछे भागने लगता है | उसके दिल में एक अजब सी कशिश होती है | उसे उस सपने के शिवा कुछ नहीं दीखता है | वो उस सपने को हासिल करना चाहता है, पागलों की तेरेह उसके पीछे भागता है | उसके चाहने वाले उसको रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन वो किसी की नहीं सुनता, और सपने के पीछे भागता रहता है | भागते भागते वो बहुत दूर निकल आता है | इतनी दूर की उसे पीछे कुछ दिखाई नहीं देता, लेकिन अचानक उसे पता चलता है की जिस सपने के पीछे वो भाग रहा था, वो कहीं गायब हो गया है | उसकी समझ में कुछ नहीं आता की अब वो क्या करे | वो बेचारा वहीँ बैठ कर रोने लगता है, और अपने आप को कोसने लगता है की मैं क्यों उस सपने के पीछे भाग रहा था जो पूरा होना संभव ही नहीं था | उसका मन बहुत भरी हो जाता है | तभी उसका साथ देने के लिए उसकी आँखों से कई अंशू की बूंदे निकल कर आती है | अंशू की बूंदों की महानता तो देखो | इतनी प्यारी, इतनी भोली भाली, आँखों से निकल कर आती है, फिर धीरे-धीरे उसके गालों को सहलाती हुई, लडखडाती हुई जमीन पर गिर जाती है और ख़त्म हो जाती हैं | इस तरह कई अंशू की बूंदे अपने आप को नष्ट कर देती हैं | यहाँ अंशु की बूंदों की उदारता तो देखो, वो उसके दिल का थोडा सा बोझ कम करने के लिए खुद को मिटा देती हैं | इसलिए अंशू ही आपके सच्चे दोस्त हैं. जय माँ झंदेवाली.