बस एक्सिडेंट
कल मैं बस स्टैंड पर बस का इंतज़ार कर रहा
था, तो मैं देखता हूँ की वहां पर बहुत भीड़ इकठ्ठा हो राखी थी, मैंने
एक आदमी से पूछा क्या हुआ भाई, इतनी भीड़ क्यों हो राखी है यहाँ पर, तो
उसने बताया की यहाँ पर ३९ नंबर बस ने एक बुजुर्ग आदमी को कुचल दिया है और
उनके दोनों पैर कट गए हैं. मैंने कहा उनको हॉस्पिटल पहुँचाया की नहीं ?.
उसने कहा नहीं वो लोग तो अभी आपस में लड़ रहे हैं | मैंने जाकर देखा तो आनंद
पर्वत के कुछ समझदार लोग ड्राईवर और कंडक्टर के साथ बहस कर रहे थे | अपनी दादागिरी दिखा कर उनको समझा रहे थे की ड्राईवर को किस तरह गाड़ी चलानी
चाहिए कहाँ पर बस रोकनी चाहिए और कहाँ पर नहीं रोकनी चाहिए | मैंने वहां पर
जाकर देखा तो वो बुजुर्ग आदमी जिनका एक्सिडेंट हुआ था दर्द से तड़प रहे थे
और लोग उनको हॉस्पिटल पहुँचाने के वजह बहस कर रहे थे और पुलिस का इंतज़ार
कर रहे थे | मैंने उन लोगो से कहा की भाई पहले इन अंकल जी को हॉस्पिटल
पहुंचा दो वो मर जायेंगे आप लोग बाद में बहस कर लेना | उनमे से एक आदमी बोला
की गाड़ी बुक करनी पड़ेगी तू करेगा गाडी बुक ? | मेरी जेब में ३० रुपये
पड़े थे लेकिन मैं फिर भी गाड़ी बुक करने चला गया | इतने में एक आदमी एक
स्कूटर वाले को लेके आ गया | मैंने और एक दो और लोगों ने अंकल जी को स्कूटर
में बिठाया और हॉस्पिटल की तरफ लेके चले गए | मेरे साथ स्कूटर में एक लड़का
और था मुझे तो पता भी नहीं था की उन्हें कौन से हॉस्पिटल लेके जाना है लेकिन
उस समय यह सोचने का भी टाइम नहीं था क्योंकि अंकल जी की हालत बहुत ख़राब हो
राखी थी | जो लड़का मेरे साथ स्कूटर में बैठा था थोड़ी दूर जाकर उसने
स्कूटर वाले को बोला की स्कूटर दूसरी साइड ले लो उस तरफ उन लोगों की गाडी रोक राखी है | जिनके ऑफिस में अंकल जी काम करते थे वो लोग अंकल जी को हॉस्पिटल
पहुंचा देंगे | स्कूटर वाले ने आनंद पर्वत रेड लाइट से यु टर्न लेकर स्कूटर
दूसरी तरफ मोड़ दिया | आगे कुछ ही दुरी पर काले रंग की गाड़ी खड़ी थी हमने
अंकल जी को उठाकर गाड़ी में लिटा दिया और उन्हें हॉस्पिटल की तरफ ले गए | मैं
अंकल जी के सर की तरफ था और उनके सर के निचे मैंने अपना हाथ लगा रखा था |
एक लड़का और अंकल जी के पैरों की तरफ बैठा था | अंकल जी के दोनों पैर कटे
हुए थे | अंकल जी को बहुत दर्द हो रहा था | मैंने अंकल जी को धीरज रखने को
कहा मेरी जुवान में माँ झंदेवाली का नाम आ रहा था | अंकल जी बोल रहे थे की
मैंने किसी का क्या बिगाड़ा था | अंकल जी की हालत देख कर बहुत दुःख हो रहा
था | मुझसे उनकी हालत देखि नहीं जा रही थी | अंकल जी ने मुझसे कहा बेटा सबका
मालिक एक, तू चिंता मत कर मैं ठीक हूँ | खुद तो दर्द से उनका बुरा हाल था और
वो मुझसे बोल रहे थे की तू चिंता मत कर | कल से बार बार मेरी आँखों में
अंकल जी का चेहता आ रहा है | अंकल जी मेरे सर पर हाथ रख कर बार बार कह रहे
थे की बेटा तू चिंता मत कर मैं ठीक हूँ | कुछ देर बाद गाड़ी जीवन माला
हॉस्पिटल में पहुँच गयी | हमने अंकल जी को ट्रोली में लिटाया और आपातकालीन
में ले गए | अंकल जी को बहुत दर्द हो रहा था | फिर मैं थोड़ी देर बाद वापस आ
गया | माँ झंदेवाली अंकल जी को दर्द सहने की शक्ति देना और उनकी आगे की
ज़िन्दगी को सुखमय बनाना |
JAI MAA JHANDEWALI


