ना जाने क्यों भगवन इन्सान को सपने देखने के लिए प्रेरित करता है, वो बेचारा नासमझी में सपनो के पीछे भागने लगता है | उसके दिल में एक अजब सी कशिश होती है | उसे उस सपने के शिवा कुछ नहीं दीखता है | वो उस सपने को हासिल करना चाहता है, पागलों की तेरेह उसके पीछे भागता है | उसके चाहने वाले उसको रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन वो किसी की नहीं सुनता, और सपने के पीछे भागता रहता है | भागते भागते वो बहुत दूर निकल आता है | इतनी दूर की उसे पीछे कुछ दिखाई नहीं देता, लेकिन अचानक उसे पता चलता है की जिस सपने के पीछे वो भाग रहा था, वो कहीं गायब हो गया है | उसकी समझ में कुछ नहीं आता की अब वो क्या करे | वो बेचारा वहीँ बैठ कर रोने लगता है, और अपने आप को कोसने लगता है की मैं क्यों उस सपने के पीछे भाग रहा था जो पूरा होना संभव ही नहीं था | उसका मन बहुत भरी हो जाता है | तभी उसका साथ देने के लिए उसकी आँखों से कई अंशू की बूंदे निकल कर आती है | अंशू की बूंदों की महानता तो देखो | इतनी प्यारी, इतनी भोली भाली, आँखों से निकल कर आती है, फिर धीरे-धीरे उसके गालों को सहलाती हुई, लडखडाती हुई जमीन पर गिर जाती है और ख़त्म हो जाती हैं | इस तरह कई अंशू की बूंदे अपने आप को नष्ट कर देती हैं | यहाँ अंशु की बूंदों की उदारता तो देखो, वो उसके दिल का थोडा सा बोझ कम करने के लिए खुद को मिटा देती हैं | इसलिए अंशू ही आपके सच्चे दोस्त हैं. जय माँ झंदेवाली.

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